The Bengal Files Review: विवेक अग्निहोत्री की सबसे कड़वी लंबी फाइल

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

विवेक अग्निहोत्री की ‘The Bengal Files’ उसी फाइल्स यूनिवर्स की तीसरी और आखिरी किस्त है, जिसमें पहले ‘The Tashkent Files’ और फिर ‘The Kashmir Files’ ने धूम मचाई थी।

यह फिल्म दो टाइमलाइन में चलती है — पहली, आज के सीबीआई अफसर शिवा (दर्शन कुमार) की जांच

दूसरी, 1946-47 के उस डरावने बंगाल की कहानी, जहां धर्म, राजनीति और नरसंहार की त्रासदी खुलकर सामने आती है।

और फिर दोनों टाइमलाइन इस तरह जुड़ती हैं कि कभी-कभी लगेगा, “प्याज की परतें खोल रहे हैं या स्क्रिप्ट?”

विषय गहरा, मगर लंबाई इतनी कि दर्शक सोचें – “क्या ये वेब सीरीज़ थी?”

3 घंटे 24 मिनट की यह फिल्म एक गंभीर विषय को उठाती है, मगर इतनी लंबी है कि दर्शक के अंदर का इतिहास प्रेमी भी कहता है – “थोड़ा कट तो मार लो।”

डायरेक्टर ने Direct Action Day, Noakhali riots, और सत्ता की साज़िशों को गंभीरता से पेश किया, लेकिन एक वक्त बाद कहानी बहकने लगती है और शिफ्टिंग टाइमलाइन दिमाग को टाइम ट्रैवल करा देती है – बिना टिकट।

  • पल्लवी जोशी की परफॉर्मेंस गोल्ड मेडल की हकदार है – एक बुजुर्ग स्वतंत्रता सेनानी जो इतिहास की गवाह हैं।

  • मिथुन चक्रवर्ती, अपने किरदार में दर्द, हताशा और ड्रामा सब लेकर आते हैं – पर कुछ सीन में “Old Monk meets Old Memories” vibes देता है।

  • दर्शन कुमार, एक बार फिर “confused but committed” अफसर की भूमिका में ठीक-ठाक।

  • सिमरत कौर रंधावा की मासूमियत और एक्टिंग बढ़िया है, लेकिन डायलॉग डिलेवरी जैसे “आपको कुछ feel होता?” – इतिहास में टाइम ट्रैवल करते हुए भी Gen Z की झलक दे जाते हैं।

  • नमाशी चक्रवर्ती, एक खतरनाक आतंकवादी के रूप में surprisingly असरदार हैं।

  • अनुपम खेर एक छोटे लेकिन महत्वपूर्ण रोल में ‘महात्मा गांधी’ को सूट से बाहर निकाल लाते हैं।

म्यूजिक & तकनीकी पक्ष:

  • बैकग्राउंड म्यूजिक प्रभावशाली है – खासकर “Kichudin Mone Mone” जो फिल्म की आत्मा बन जाती है।

  • ग्राफिक्स यथासंभव दमदार हैं, लेकिन एडिटिंग थोड़ा और कस सकती थी।

  • डायलॉग्स कुछ जगह मार्मिक, तो कुछ जगह WhatsApp यूनिवर्स से प्रेरित लगते हैं।

फाइल्स यूनिवर्स में अब ये तीसरी फाइल आई है।

अगर आप सोच रहे हैं – अगली कौन सी होगी? तो जवाब है, “The Recycle Bin Files” – जो कुछ भी छूट गया, वो वहाँ मिलेगा!”

और हाँ, 3 घंटे 24 मिनट तक बैठे रहना अगर आपको लगे कि देशभक्ति की ultimate परीक्षा है – तो popcorn भूल जाइए, painkiller ले आइए

The Bengal Files एक साहसी प्रयास है – जिसमें इतिहास की जटिलता, राजनीति की चालें और मानवीय पीड़ा को दिखाने की कोशिश की गई है।

हालांकि इसका बॉलीवुडाइज़ेशन और लंबा रनटाइम इसे कभी-कभी उस संदेश से दूर ले जाता है, जो फिल्म कहना चाहती है।

रेटिंग:1.5/5 – (1 स्टार देशभक्ति के लिए, स्टार पल्लवी जोशी के लिए, स्टार कंटेंट के लिए, और 0.5 स्टार उस लंबाई के लिए जो “सांझ से सवेरा” कर दे।)

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